किशोरी विकास
किशोरी विकास
किशोरी विकास
सेवा भारती द्वारा संचालित किशोरी विकास प्रकल्प का उद्देश्य किशोरियों को एक बेहतर जीवन के लिए तैयार करना है। इस प्रकल्प के माध्यम से उन्हें शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक रूप से सशक्त बनाया जाता है ताकि वे आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी, विवेकशील और जागरूक नागरिक बन सकें।
क्यों आवश्यक है किशोरी विकास?

किशोरावस्था जीवन का सबसे संवेदनशील पड़ाव होता है, विशेषकर लड़कियों के लिए। इस उम्र में शारीरिक और मानसिक बदलावों के कारण कई बार वे भ्रम, डर और तनाव से घिर जाती हैं। ऐसे समय में उचित मार्गदर्शन और सहयोग उन्हें आत्मबल और दिशा प्रदान करता है।
प्रकल्प के प्रमुख घटक
1. शारीरिक विकास
किशोरियों को योग, प्राणायाम, खेल, स्वच्छता, पोषण और आत्मरक्षा के महत्व के बारे में सिखाया जाता है। साथ ही घरेलू इलाज की जानकारी भी दी जाती है ताकि वे सामान्य बीमारियों से स्वयं निपट सकें।
2. मानसिक विकास
तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच, जीवन मूल्यों की समझ, भावनात्मक संतुलन और समय प्रबंधन जैसे विषयों पर चर्चा की जाती है, जिससे वे मानसिक रूप से मजबूत बनें।
3. सामाजिक विकास
किशोरियों को संवाद कौशल, नेतृत्व क्षमता, पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति सजग किया जाता है। उन्हें अपने व्यक्तित्व को निखारने और समाज से जुड़ने के तरीकों से परिचित कराया जाता है।
4. बौद्धिक विकास
समस्याओं के समाधान, सामाजिक मुद्दों पर चर्चा, राष्ट्र के प्रति भूमिका, और जिम्मेदारी जैसे विषयों पर विचार-विमर्श कर उनकी सोचने और समझने की क्षमता को विकसित किया जाता है।
अन्य गतिविधियाँ
प्रकल्प के अंतर्गत समय-समय पर प्रतियोगिताएं, कौशल विकास प्रशिक्षण, प्रेरणादायक कहानियाँ और रचनात्मक गतिविधियाँ करवाई जाती हैं जिससे किशोरियों की प्रतिभा को मंच मिल सके।
कार्य प्रणाली
यह प्रकल्प बस्ती आधारित होता है, जहाँ सप्ताह में एक दिन, 2 घंटे की कक्षा चलती है। केंद्रों में बस्ती की ही एक बहन शिक्षिका के रूप में कार्य करती हैं और सेवा भारती की कार्यकर्ता बहनें समय-समय पर मार्गदर्शन हेतु उपस्थित होती हैं।
वर्तमान में सेवा भारती दिल्ली द्वारा 13 केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जहाँ प्रत्येक केंद्र में लगभग 15-20 बच्चियाँ जुड़ी हुई हैं।

