इस प्रकल्प के माध्यम से किशोरियों को स्वस्थ, शिक्षित, संतुलित, स्वावलंबी, आत्मविश्वासी, विवेकशील, जागरूक, आत्मनिर्भर, सुयोग्य नागरिक बनाना और वेअपनी सुरक्षा करने में सक्षम हो व स्वयं के महत्व को समझने वाली बन सकें, ये सभी विषय इस पाठ्यक्रम में सम्मिलित हैं।
मनुष्य के जीवन का सबसे संवेदनशील पड़ाव उसकी किशोरावस्था ही होती है खासकर लड़कियों की, क्योंकि वो ना तो अपनी बात किसी से कह पाती हैं और ना ही उस अवस्था में इतनी समझ होती है कि स्वयं को संभाला जा सके, क्योंकि किशोरावस्था में बच्चियों के अंदर बहुत से परिवर्तन होते हैं जिसके कारण उनके मन में भटकाव की स्थिति उत्पन्न होती है। उस स्थिति को ध्यान में रखते हुए सेवा भारती द्वारा किशोरियों के शारीरिक, मानसिक सामाजिक और बौद्धिक विकास हेतु इस प्रकल्प को चलाया जा रहा है, जिसे किशोरी विकास के नाम से जाना जाता है।
शारीरिक विकास
किशोरियों को तरह तरह के खेल खिलाना, अपनी दिनचर्या में योग प्राणायाम को शामिल करना, अपनी स्वच्छता का ध्यान रखना, अपने खान पान का ध्यान रखना, अपने अंदर हो रहे शारीरिक बदलाव को समझना अपनी संस्कृति व संस्कारों को किसी कहानी के साथ बताना, सामान्य बीमारियों के घरेलू इलाज से स्वयं को स्वस्थ रखने तथा प्राथमिक सहायक चिकित्सा तथा आत्म सुरक्षा करने के बारे में भी बताया जाता है।
मानसिक विकास
इसी प्रकार से मानसिक विकास हेतु किशोरियों को किसी भी प्रकार का मानसिक अवसाद ना हो इसके लिए तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोंच, स्व मूल्यांकन, जीवन मूल्यों का समावेश, विवेकशील चिंतन, भावनात्मक संतुलन तथा समय प्रबंधन जैसे विषयों के बारे में जानकारी दी जाती है।
सामाजिक विकास
किशोरिया समाज में रहकर अपने व्यक्तित्व को कैसे निखार सकती हैं इस हेतु किसी प्रभावी व्यक्तित्व के बारे में चर्चा करना, संवाद कौशल कैसा हो? उनके अंदर नेतृत्व करने की क्षमता कैसे विकसित हो, परिवार का महत्व क्या होता है? हमारे सामाजिक व सांस्कृतिक मूल्यों का क्या महत्व है, समाज के साथ संबंध कैसे होने चाहिए तथा हमारा पर्यावरण संरक्षण कैसे अच्छा हो सकता है इन सभी विषयों पर किशोरियों के साथ स्वस्थ चर्चा की जाती है जिससे उनका सामाजिक विकास भी हो सके।
बौद्धिक विकास
एक किशोरी भविष्य की कुशल महिला बन सके इसके लिए उसका बौद्धिक स्तर अच्छा होना भी आवश्यक है, इसके लिए किशोरियों के बौद्धिक विकास हेतु उन्हें समाज में किसी भी विषय पर चर्चा करना, समस्याओं का समाधान कैसे हो सकता है तथा अपनी भूमिका राष्ट्र के प्रति कैसे और बढ़ सके, सामाजिक कार्यों में उनकी क्या भूमिका होनी चाहिए और अपनी जिम्मेदारी को कैसे निभाना है, राष्ट्र हित का ध्यान रखते हुए अपने कार्यों को करना उनकी नैतिक जिम्मेदारी होनी चाहिए, ऐसी चर्चा किशोरियों के साथ की जाती है।
उनकी प्रतिभा का विकास करवाना जिससे कि वे समाज में अपने आप को स्थापित कर सकें, अपने और अपने परिवार के साथ बच्चियों के संबंध मधुर रहे, अपनी बात को किस तरह से कहना है यह सब उन बच्चियों को इस प्रकल्प के माध्यम से सिखाया जाता है। इसके अलावा समय-समय पर कोई प्रतियोगिता करवाना उन्हें स्वावलंबी बनाने हेतु कुछ कौशल विकास का प्रशिक्षण देना आदि। यह सभी विषय भी इस प्रकल्प में रहते हैं।
सेवा भारती द्वारा चलाया जा रहा यह प्रकल्प बस्ती आधारित है। प्रत्येक केन्द्र 2 घंटे के लिए साप्ताहिक चलता है, केंद्र पर एक शिक्षिका बस्ती की ही कोई बहन वहां जाकर 2 घंटे के लिए बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार के साथ कक्षा चलाती हैं, तथा सेवा भारती की कार्यकर्ता बहने भी समय-समय पर केदो पर जाकर अपना मार्गदर्शन देती हैं।
वर्तमान में सेवा भारती दिल्ली में 13, केंद्र चल रहे हैं, प्रत्येक केंद्र पर 15 से 20 बच्चियां क्लास लेती हैं।